खुद को युवा होते देखना
भर देता है अंगूरी एहसास
हर युवती के हृदय में
प्युपा से रेशम बनने की
ये प्रक्रिया भर देती है
अनेकों कोमल ख्याल
हृदय तल में
शनैः शनैः होता काया
में परिवर्तन
मज़बूर करता रहता है
देखने को दर्पण
केशों का लहरना,
आँखों का झुक जाना
चुपके से देख तिरछे मुस्कुराना
बिना शिक्षा बिना अभ्यास
बन जाता है नियंत्रित व्यवहार
पर कहीं दबे हृदय तल में
दर की जड़ें उभर आती हैं
जिसे ना वो खुद को
ना दूजे को समझा पाती है
रोज़ आती भयानक खबरें
ख्वाबों में उत्पात मचाती हैं
किसे रखवाला कहें, किसे बलात्कारी
विचारों में फंस जाता है
कहीं कोई भाई था,
कोई पिता
कोई सहकर्मचारी
जैसे बन गया – भेड़िया बलात्कारी !!!!!!
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