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Sunday, 7 June 2015

किसे दोष दें ?

किसे दोष दें, किसे दोष दें,
घोटालों के लिए,
भूख, गरीबी,
महंगाई के लिए,
किसे दोष दें।

बढ़ते अपराधों के लिए,
मरते इन्सानो के लिए,
बेआबरू होती
माँ बहनो के लिए,
किसे दोष दें।

अयोग्य हुक्मरानों के लिए,
हमें तोड़ते नारों के लिए,
खुद पर होते
अत्याचारों के लिए,
किसे दोष दें।

अत्महत्या करते
किसानों के लिए,
रोटी के लिए बिकते
इन्सानों के लिए,
खोती हुई हमारी
पहचानों के लिए,
किसे दोष दें।
किसे दोष दें, हमारी बेहोशी के लिए,
किसे दोष दें, हमारे अज्ञानता के लिए,
किसे दोष दें, हमारी नज़र के खोट के लिए।

लुटेरों को, हत्यारों को,
अयोग्य पहरेदारों को,
चुना है मैंने, 
अपने मतलब के लिए
दिखाये गए छोटे
लालच की बेहोशी में,
ईर्ष्या से, कुंठ बुद्धि से
उपजी अज्ञानता से,
पढ़ाये गए धर्म से
उपजे नज़र के खोट से।
चुना है मैंने।

फिर भी मैं सोचती हूँ किसे दोष दें
                               कहिये आख़िर किसे
                                    दोष दें   ।।





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