जब जब सड़को पर देखा है
कोई भूखा बचपन बैठा है
मेरा दिल छलनी सा होकर
आंसुओ की धारा देता है
सच कहती हूँ तुमको हे ईश्वर
इतना भावुक होना भी ठीक नहीं......
जब जब सड़कों के ढाबों पर
कोई नन्हा फूल सुकोमल सा
ढेरों बर्तन के धोता है
जैसे मेरे ही सुकोमल हाथो से
हर लहू का कतरा बहता है
सच कहती हूँ तुमको हे ईश्वर
इतना भावुक होना भी ठीक नहीं......
जब जब माँ बाप के झगड़ो में
निर्मल मासूम निश्छल मस्तिष्क
विक्षिप्त सा बचपन सहता है
मेरे बचपन के कोनों से
हर ख़ुशी का लम्हा रोता है
सच कहती हूँ तुमको हे ईश्वर
इतना भावुक होना भी ठीक नहीं
इतना भावुक होना भी ठीक नहीं
कोई भूखा बचपन बैठा है
मेरा दिल छलनी सा होकर
आंसुओ की धारा देता है
सच कहती हूँ तुमको हे ईश्वर
इतना भावुक होना भी ठीक नहीं......
जब जब सड़कों के ढाबों पर
कोई नन्हा फूल सुकोमल सा
ढेरों बर्तन के धोता है
जैसे मेरे ही सुकोमल हाथो से
हर लहू का कतरा बहता है
सच कहती हूँ तुमको हे ईश्वर
इतना भावुक होना भी ठीक नहीं......
जब जब माँ बाप के झगड़ो में
निर्मल मासूम निश्छल मस्तिष्क
विक्षिप्त सा बचपन सहता है
मेरे बचपन के कोनों से
हर ख़ुशी का लम्हा रोता है
सच कहती हूँ तुमको हे ईश्वर
इतना भावुक होना भी ठीक नहीं
इतना भावुक होना भी ठीक नहीं
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