संजनियाँ की संजना - यूँ तो लिखने का शौक मुझे हमेशा से था पर जब आस पास घटती अच्छी और बुरी घटनाओं की समझ प्रबल हुई तो गंभीर लेखन का विचार मन में आया और बस मैं अपने आस पास की चीज़ों को कलमबद्ध करने लगी। उन्ही कलमबद्ध किए हुए काव्यों और कहानियों को आप तक पहुँचाने के लिए इस माध्यम को चुना ।
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