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Sunday, 7 June 2015

मेरा मैं

कल रात
मेरे मैं से
मेरी मुलाक़ात हुई,
मैं, ने मुझ से पूछा,
तू आखिर चाहता क्या है ?
ये ! तू जाता कहाँ है ?
मैं को मेरा जवाब--
चाहता हूँ सबके लिए सुकून,
चाहता हूँ सबकी राह हो आसान,
चाहता हूँ सबके लिए प्रगति,
 उन्नति और अथाह सम्मान,
जाता हूँ, जहां हो सबका साथ ,
 प्रेम और विश्वास,
मैं ने मुझ से पूछा ?
 इसमे मैं कहाँ हूँ ?
जवाब आया--
सब में हूँ मैं, मुझ में हैं सब,
मैं, को साथ ले के कोई सफल हुआ है कब,
और फिर मेरा मैं मुझ में समा गया,
मेरा मैं खतम हो गया, हम आ गया।






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